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नमो नमम्

Posted On: 28 Jun, 2014 Others में

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हे स्वयंसिद्ध, हे पुरुषोत्तम,
तुम राष्ट्रकवच, तुम आनन्दं,
तुम प्रखरचक्षु, शुभतम, प्रियतम
भारत को तारो हे महानतम।
ऊपर कठोर, अन्दर मृदुतम ,
तुमसे ही नि: सृत राजधर्म,
तुम आर्यह्रदय के अन्तरतम,
तुम देवतुल्य, तुम पूर्ण, परम ।
तुम ही विधि-हरि-हर सर्व सुरम,
तुममें विकास का छिपा मर्म,
तुम प्रथम, मध्य, उत्तम पुरूषम,
सब क्षुद्र तुम्हारे समक्षतम ।
तुम संविधान की मूर्ति स्वयं,
तुममें सम होते सभी धर्म,
हे मातृभक्त , संस्कृतिदूतम्,
हम करते तेरा नमो नमम ।
तुमसे गुंजित मुखपुस्तकम् ,
जय-जय करता जनमाध्यम ,
कलरव करते हो जब भी तुम,
होता प्रकाश, भग जाता तम ।
सिन्धु नदी के उदगम से ,
यावद् इन्दु सरोवरम् ,
वह सहस्र योजनों तक विस्तृत ,
जम्बूद्वीपम , भारतखण्डम्
तुम महाबली , तुम चक्रव्रतिम् ,
तुमनें ही की भारत विजयम ।
यदा यदाहि धर्मस्य ,
ग्लानिर्भवति भारतम् ,
धर्म संस्था पुर्नाथाय ,
संभव होता तेरा उदयम ,
हो भारत भाग्य विधाता तुम ,
जनरंजनम , अरिगंजनम् ।
अयोध्या , मथुरा , माया ,
काशी , कांची , अवंतिकम ,
पुरी , द्वारावती चैव ,
तुम इनके उन्नायकम् ,
नदियों , नगरों के त्राता तुम ,
जय देवपगा उद्धारकम् ।
तुम नेति – नेति तुम परमब्रह्म ,
सब वादों में तुम तर्कोत्तम ,
हम , धन्य धरा पर आए तुम ,
हे पावन कल्की अवतारम् ।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 29, 2014

आपकी नमो-भक्ति सराहनीय है .बधाई

    utkarshsingh के द्वारा
    July 4, 2014

    धन्यवाद शिखा जी , हर पाठक का अधिकार होता है कि वह अपने अनुसार काव्य की समीक्षा करे । कृपया इस पन्ने पर आवागमन बनाए रखियेगा ।

Shobha के द्वारा
June 28, 2014

अति सुंदर कविता उससे भी सुंदर भाव खूबसूरत तुक बंदी मेरे पास इससे ज्यादा शब्द नहीं हैं उतकर्ष बहुत आगे जायेंगे शोभा

    utkarshsingh के द्वारा
    July 4, 2014

    शोभा जी , ह्रदय के अन्त:स्थल से आपका आभारी हूँ किन्तु इस प्रशंशा के योग्य मैं नहीं हूँ , फिर भी यदि मेरा लेखकीय कृत्य अच्छा लगा हो तो पन्ने पर आवागमन बनाए रखने की कृपा कीजिएगा । आभारी रहूँगा ।


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